कई बार कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद की ऐसे समय में मदद कर जाता है कि दूसरा शख्स सारी जिंदगी के लिए उसका कर्जदार बन जाता है। इसी तरह का एक मामला मानसा में सामने आया है, जहांं एक मरीज को खून की बहुत जरूरत थी। हेमा गुप्ता नाम की महिला जोकि सरकारी सेकंडरी स्कूल मानसा में हिंदी की अध्यापिका है, ने स्थानीय सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में एमरजैंसी जरूरत पडऩे पर खून देकर मरीज की जान बचाई।
हेमा गुप्ता ने 20वीं बार रक्तदान किया है और वह साल में तीन बार रक्तदान करती हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से उन्हें कोई कमजोरी महसूस नहीं होती और मन को शान्ति मिलती है। उनका यह भी कहना है कि महिलाओं को रक्तदान मुहिम के साथ जुड़कर जरूरतमंद मरीजों की मदद करनी चाहिए और खून देने से डरना नहीं चाहिए।

No comments:
Post a Comment