
विदेशी कंपनियों को रोकना होगा। इसी फंडिग की देंन है आतंकबाद और नक्सलबाद उर्गबाद अल्फ़ा उल्फा से लेकर मोदी भारत की तमाम छोटे बड़े संगठन को जो किसी न किसी रूप में भारत देश है,जो मोदी उसको बर् बाद कर ने में लगे हुए है।-
विदेशी कंपनियों के उत्पाद अग्रेजी दवाई जो जानवरों को मार कर बनते है। विदेशी कंपनियों के कास्मेटिक जो जानवरों को मार कर बनते है। विदेशी कंपनियों के चाकलेट बिस्किट चिप्स सब जानवरों को मार कर बनते है। अग्रेजी खाद जहरीले केमिकल और कीटनाशक जो जानवरों सहित इंसानों को भी मार रहे है। फिर भी हम फारेन डायरेक्ट इन्वेस्ट की बात कर रहे है। जबकि ये कंपनियों पुरे देश के लोगो को गौमांस और सुवर का मांस खिला रही है। इन्ही कंपनियों ने पुरे देश के लोगो को बीमार बना दिया है। इन्ही कंपनियों नदी जंगल पहाड़ को ख़त्म कर दिया। हवा पानी मिटटी भोजन सबको जहरीला बना दिया।
केजरीवाल और राहुल विदेशी कंपनियों के दलाल थे। तो मोदी क्या है? सबको विदेशी धन चाहिए। चाहे वो ngo हो या सरकार। कंपनिया ही ngo को फंडिंग करती है और कंपनिया ही देश में इन्वेस्ट। दोनों फारेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट है। एक समाज सेवा के नाम है। तो दूसरा विकास के नाम पर। दोनों तरीके से देश का नुकसान हो रहा है। पहले विदेश कंपनिया हम लोगो को लूट कर पैसा कमाती है। फिर उसी पैसों को हमारे ऊपर समाज सेवा के नाम लगाकर धर्म परिवर्तन करती है। पहले हमको लूट कर कंगाल कर देगी फिर कंगाल करने के बाद कुछ रूपये दान के रूप में देगी जिसके बदले हमको धर्म परिवर्तन होगा। मतलब जितने अधिक विदेशी कंपनिया भारत में खुलेगी उतनी जल्दी भारत का इसाई करण हो जायेगा। अगर भारत को बचाना है। तो विदेशी कंपनियों को रोकना होगा। इसी फंडिग की देंन है आतंकबाद और नक्सलबाद उर्गबाद अल्फ़ा उल्फा से लेकर मोदी भारत की तमाम छोटे बड़े संगठन को जो किसी न किसी रूप में भारत देश है,जो मोदी उसको बर् बाद कर ने में लगे हुए है।-
विदेशी कंपनियों के उत्पाद अग्रेजी दवाई जो जानवरों को मार कर बनते है। विदेशी कंपनियों के कास्मेटिक जो जानवरों को मार कर बनते है। विदेशी कंपनियों के चाकलेट बिस्किट चिप्स सब जानवरों को मार कर बनते है। अग्रेजी खाद जहरीले केमिकल और कीटनाशक जो जानवरों सहित इंसानों को भी मार रहे है। फिर भी हम फारेन डायरेक्ट इन्वेस्ट की बात कर रहे है। जबकि ये कंपनियों पुरे देश के लोगो को गौमांस और सुवर का मांस खिला रही है। इन्ही कंपनियों ने पुरे देश के लोगो को बीमार बना दिया है। इन्ही कंपनियों नदी जंगल पहाड़ को ख़त्म कर दिया। हवा पानी मिटटी भोजन सबको जहरीला बना दिया।
केजरीवाल और राहुल विदेशी कंपनियों के दलाल थे। तो मोदी क्या है? सबको विदेशी धन चाहिए। चाहे वो ngo हो या सरकार। कंपनिया ही ngo को फंडिंग करती है और कंपनिया ही देश में इन्वेस्ट। दोनों फारेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट है। एक समाज सेवा के नाम है। तो दूसरा विकास के नाम पर। दोनों तरीके से देश का नुकसान हो रहा है। पहले विदेश कंपनिया हम लोगो को लूट कर पैसा कमाती है। फिर उसी पैसों को हमारे ऊपर समाज सेवा के नाम लगाकर धर्म परिवर्तन करती है। पहले हमको लूट कर कंगाल कर देगी फिर कंगाल करने के बाद कुछ रूपये दान के रूप में देगी जिसके बदले हमको धर्म परिवर्तन होगा। मतलब जितने अधिक विदेशी कंपनिया भारत में खुलेगी उतनी जल्दी भारत का इसाई करण हो जायेगा। अगर भारत को बचाना है। तो विदेशी कंपनियों को रोकना होगा। इसी फंडिग की देंन है आतंकबाद और नक्सलबाद उर्गबाद अल्फ़ा उल्फा से लेकर मोदी भारत की तमाम छोटे बड़े संगठन को जो किसी न किसी रूप में भारत देश है,जो मोदी उसको बर् बाद कर ने में लगे हुए है।-
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